बच्चों की शिक्षा/ विवाह के लिए बीमा पॉलिसी


शिक्षा आज के सर्वाधिक मँहगी आवश्यकताओं में से एक है। परिवार में सन्तान के आते ही उसकी उच्च शिक्षा अथवा (कन्या जन्म के मामले में उसके) विवाह की चिन्ता सताने लगती है। ऐसे में, भारतीय जीवन बीमा निगम की ‘शिक्षा/विवाह बन्दोबस्ती पॉलिसी’ (तालिका 90) पिता/माता को इस चिन्ता से मुक्त करने में सहायक होती है। भारतीय जीवन बीमा निगम की यह पॉलिसी उन लोगों के लिये ‘आदर्श पॉलिसी’ है जो अपनी सन्तान की शिक्षा अथवा विवाह के लिये एक सुनिश्चित समय पर सुनिश्चित आर्थिक व्यवस्था करना चाहते हैं।

पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक के जीवन पर बीमा धन के बराबर रिस्क कवरेज उपलब्ध रहता है और दुर्घटना-मृत्यु की स्थिति में यह कवरेज बीमा धन से दुगुना होता है । पॉलिसी अवधि पूरी होने पर पॉलिसीधारक को मूल बीमा धन की राशि तथा पॉलिसी अवधि की बोनस राशि (तथा अन्तिम-अतिरिक्त बोनस राशि, यदि कोई देय हो तो) का भुगतान किया जाता है ।

पॉलिसी अवधि के दौरान यदि दुर्भाग्यवश पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाए तो -


1. सामान्य मृत्यु की दशा में नामित व्यक्ति को तत्काल तो कोई भुगतान नहीं मिलेगा किन्तु पॉलिसी की अवधि पूरी होने के दिनांक को उपरोक्त वर्णित समस्त धन राशि (अर्थात् मूल बीमा धन की रकम तथा सम्पूर्ण पॉलिसी अवधि की बोनस राशि तथा अन्तिम-अतिरिक्त बोनस राशि (यदि कोई देय हो तो) का भुगतान नामित व्यक्ति को मिलेगा ।

2. दुर्घटना मृत्यु की दशा में मूल बीमा धन के बराबर राशि का भुगतान नामित व्यक्ति को तत्काल किया जाएगा तथा पॉलिसी अवधि पूरी होने पर उपरोक्त वर्णित समस्त रकम नामित व्यक्ति को पुनः भुगतान की जाएगी ।


अर्थात्, पॉलिसी अवधि पूरी होने से पहले, पॉलिसीधारक की अकस्मात मृत्यु के बाद उसकी सन्तान की शिक्षा/विवाह के लिये पॉलिसीधारक द्वारा निर्धारित की गई अवधि पर एक सुनिश्चित रकम उपलब्ध कराने की सुनिश्चित व्यवस्था यह पॉलिसी उपलब्ध कराती है ।

उदाहरण - 27 वर्षीय ‘श्रीमान् क’ आज एक बिटिया के बाप बने हैं। उनका अनुमान है कि उसके 23वें वर्ष में वे उसका विवाह कर देंगे। इस हेतु वे 23 वर्ष की अवधि के लिए 5 लाख रुपये बीमाधन की यह पॉलिसी लेते हैं। इसकी वार्षिक प्रीमीयम होगी रुपये 20,088/- अर्थात् वे 23 वर्षों तक, 20,088/- रुपये प्रति वर्ष चुकाएँगे। पॉलिसी अवधि पूरी होने पर उन्हें परिपक्वता राशि रुपये 13,37,000 (अनुमानित) का भुगतान मिलेगा। इस राशि में मूल बीमाधन की रकम रुपये 5 लाख, 23 वर्षों के बोनस की अनुमानित रकम रुपये 5,52,000 तथा अन्तिम-अतिरिक्त बोनस की अनुमानित रकम रुपये 2,85,000 शामिल है। (बोनस की गणना, भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा वर्ष 2007-08 के लिए घोषित बोनस दरों के आधार पर की गई है।)


‘श्रीमान् क’ को, किश्तों की रकम पर आय कर अधिनियम की धारा 80 सी के अन्तर्गत आय कर छूट मिलेगी तथा परिपक्वता पर मिलने वाली सम्पूर्ण राशि, आय कर अधिनियिम की धारा 10 (10) (डी) के अन्तर्गत आय कर से मुक्त होगी।


इस 23 वर्षों की अवधि के दौरान ‘श्रीमान् क’ के जीवन पर सामान्य मृत्यु की दशा में 5 लाख रुपयों का तथा दुर्घटना मृत्यु की दशा में 10 लाख रुपयों का रिस्क कवरेज उपलब्ध रहेगा। अर्थात् 23 वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले यदि, परिवार के दुर्भाग्य से ‘श्रीमान् क’ की मृत्यु हो गई तो -


(1) सामान्य मृत्यु होने पर, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को तत्काल कोई भुगतान नहीं मिलेगा। चूँकि बीमित व्यक्ति (अर्थात् ‘श्रीमान् क’) की मृत्यु हो चुकी है सो प्रीमीयम जमा कराने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। किन्तु शेष अवधि के लिए पॉलिसी पूरी तरह प्रभावी मानी जाएगी (अर्थात्, उसे बोनस की पात्रता मिलती रहेगी) और निर्धारित परिपक्वता दिनांक को, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को उपरोल्लेखित राशि (अनुमानित 13 लाख 37 हजार रुपये) का भुगतान किया जाएगा।


(2) यदि ‘श्रीमान् क’ की मृत्यु किसी दुर्घटना के कारण हुई है तो मूल बीमा धन (रुपये 5 लाख) के बराबर की रकम का भुगतान, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को तुरन्त कर दिया जाएगा और पॉलिसी की निर्धारित परिपक्वता दिनांक को, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को उपरोल्लेखित राशि (अनुमानित 13 लाख 37 हजार रुपये) का भुगतान फिर से किया जाएगा।


विशेषता -


इस पॉलिसी का भुगतान या तो (परिपक्वता पर) स्वयम् पॉलिसीधारक को मिलेगा या फिर (पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाने की दशा में) उसके नामित व्यक्ति को मिलेगा।


सामान्य मृत्यु के बाद तत्काल भुगतान न मिलने से, बीमा से मिलने वाली रकम के अनुचति उपयोग (यथा मृत्यु-भोज जैसी उत्तर क्रियाओं में) होने की आशंका नहीं रह पाती है।


भुगतान सन्तान को न मिलने से भी, उसके अनुचित उपयोग की आशंक स्वतः नष्ट हो जाती है।


सन्तान के विवाह के लिए अवधि का अनुमान ही लगाया जा सकता है। यदि बीमा पुत्री का हो और पॉलिसी परिपक्वता से पहले ही उसका विवाह हो जाए तो, विवाहोपरान्त, पॉलिसी की परिपक्वता रकम पर पुत्री का ससुराल पक्ष अधिकार जता सकता है। किन्तु इस पॉलिसी में बीमा चूँकि पिता अथवा माता का होता है, सन्तान का नहीं, इसलिए, इस पॉलिसी की परिपक्वता राशि पर, पुत्री के ससुराल पक्ष द्वारा अधिकार जताने की आशंकाएँ भी स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं।


उच्च शिक्षा में सहायक -
बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु सुनिश्चित आर्थिक व्यवस्थाएँ इस पॉलिसी के माध्यम से की जा सकती हैं।


आयु के 17वें वर्ष में बच्चा, उच्च शिक्षा के दरवाजे पर खड़ा होता है। आज के चलन के अनुसार उसे अगले 6 वर्ष तो पढ़ना ही है - बी।ई. (अथवा ऐसे ही किसी स्नातक पाठ्यक्रम के लिए) 4 वर्ष और एम. बी. ए. के लिए 2 वर्ष। ऐसे मामलों में व्यक्ति को एक-एक लाख रुपये बीमा धन की 6 पॉलिसियाँ लेनी चाहिए (क्षमता तथा आवश्यकतानुसार अधिक बीमा धन की पॉलिसियाँ भी ली जा सकती हैं) जिनकी अवधि क्रमशः 17 वर्ष, 18 वर्ष, 19 वर्ष, 20 वर्ष, 21 वर्ष और 22 वर्ष होंगी।


17 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 71 हजार रुपये, 18 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 73 हजार रुपये, 19 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 78 हजार रुपये 20 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 78 हजार 500 रुपये, 21 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 83 हजार रुपये और 22 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 85 हजार 500 रुपये मिलेंगे। (अधिक बीमा धन की पॉलिसियाँ लेने पर यह रकम उसी अनुपात में अधिक मिलेगी।) अर्थात् बच्चे की शिक्षा के लिए न केवल प्रति वर्ष रकम उपलब्ध रहेगी अपितु प्रति वर्ष यह बढ़ती ही जाएगी।


जैसा कि पहले बताया जा चुका है, पॉलिसीधारक रहे या न रहे, रकम की यह उपलब्धता सुनिश्चित है।


उपरोक्तानुसार पॉलिसियाँ लेने पर पॉलिसीधारक को पहले 17 वर्षों तक 6 पॉलिसियों की प्रीमीयम चुकानी पड़ेगी। उसके बाद प्रति वर्ष, जैसे-जैसे एक-एक पॉलिसी पूरी होती जाएगी, प्रीमीयम की रकम कम होती जाएगी। अर्थात् 17 वर्षों के बाद मिलने वाली रकम में जहाँ प्रति वर्ष वृद्धि होगी वहीं प्रीमीयम भुगतान का वजन प्रति वर्ष कम होता जाएगा।


इसी के समानान्तर, 17वें वर्ष से, जैसे-जैसे पॉलिसी पूरी होती जाएगी, पॉलिसीधारक का रिस्क कवरेज भी प्रति वर्ष कम होता जाएगा।


पॉलिसी से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण बातें -


(1) 18 वर्ष से 60 वर्ष तक की आयु के व्यक्ति यह पॉलिसी ले सकते हैं।


(2) पॉलिसी की न्यूनतम अवधि 5 वर्ष तथा अधिकतम अवधि 25 वर्ष है। किन्तु परिपक्वता के समय पॉलिसीधारक की अधिकतम आयु 70 वर्ष तक होनी चाहिए। अर्थात् 60 वर्ष के व्यक्ति को यह पॉलिसी अधिकतम 10 वर्ष की अवधि के लिए मिल सकेगी।


(3) न्यूनतम बीमा धन रुपये 50,000। उसके बाद रुपये 5000 के गुणांक में। अधिकतम बीमाधन का निर्धारण व्यक्ति की आयु तथा आय के आधार पर होगा।


(4) दुर्घटना हित लाभ -‘निगम’ की समस्त पॉलिसियों सहित, अधिकतम 50 लाख रुपये।


(5) किश्त भुगतान विधि - वार्षिक, अर्द्ध वार्षिक, तिमाही, मासिक तथा वेतन बचत योजना।


(6) पॉलिसी पर ‘पॉलिसी ऋण’ लिया जा सकता है।


(7) पॉलिसी समनुदेशित की जा सकती है।


जिन परिवारों में बच्चे अभी एक वर्ष के नहीं हुए हैं उन्हें यह पॉलिसी लेने पर अवश्य ही विचार करना चाहिए।

-----


आपकी बीमा जिज्ञासाओं/समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराने हेतु मैं प्रस्तुत हूँ। यदि अपनी जिज्ञासा/समस्या को सार्वजनिक न करना चाहें तो मुझे bairagivishnu@gmail.com पर मेल कर दें। आप चाहेंगे तो आपकी पहचान पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी। यदि पालिसी नम्बर देंगे तो अधिकाधिक सुनिश्चित समाधान प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी।


यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्य भेजें । मेरा पता है - विष्णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर - 19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001.

3 comments:

  1. आभार जानकारी पेश करने का.

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर जानकारी, ओर उपयोगी भी.
    धन्यवाद
    आप को ओर आप के परिवार को दिपावली की बहुत बहुत शुभकामानये

    ReplyDelete
  3. विष्णु जी,

    उपयोगी जानकारी का धन्यवाद!
    दीपावली के पर्व पर आपको और समस्त परिवार को अगणित मंगलकामनाएं! आज ही कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं. अभी पूरी नहीं हुई हैं मगर सबसे पहले आप को सुना रहा हूँ:

    साल की सबसे अंधेरी रात में
    दीप इक जलता हुआ बस हाथ में
    लेकर चलें करने धरा ज्योतिर्मयी.

    कड़वाहटों को छोड़ कर पीछे कहीं
    अपना-पराया भूल कर झगडे सभी
    झटकें सभी तकरार ज्यों आयी-गयी.

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी मुझे सुधारेगी और समृद्ध करेगी. अग्रिम धन्यवाद एवं आभार.